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वैश्विक खाद्य कीमतों में लगातार पांचवें महीने गिरावट: FAO रिपोर्ट

by kishanchaubey
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संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 में वैश्विक खाद्य कीमतों में लगातार पांचवें महीने गिरावट दर्ज की गई। दूध, चीनी और मांस जैसे आवश्यक उत्पादों के दाम घटने से महंगाई पर दबाव कम हुआ है। हालांकि, चावल और वनस्पति तेल की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। FAO का फूड प्राइस इंडेक्स जनवरी में औसतन 123.9 अंक पर रहा, जो दिसंबर 2025 से 0.4% कम और पिछले साल की समान अवधि से 0.6% नीचे है।

अनाज की कीमतों में मामूली 0.2% की बढ़ोतरी हुई, लेकिन गेहूं और मक्के के दाम थोड़े कम हुए। अनाज मूल्य सूचकांक 107.5 अंक पर रहा। रूस और अमेरिका में मौसम संबंधी चिंताओं का असर सीमित रहा, जबकि अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया में अच्छी फसल की उम्मीद से भंडार मजबूत हैं। चावल की कीमतों में 1.8% की वृद्धि हुई, खासकर खुशबूदार किस्मों की मांग बढ़ने से। जौ के दाम हल्के बढ़े, जबकि ज्वार के कम हुए।

वनस्पति तेल सूचकांक में 2.1% की तेजी आई, जो 165.2 से बढ़कर 168.6 अंक पर पहुंचा। दक्षिण-पूर्व एशिया में उत्पादन सुस्ती और आयात मांग से पाम ऑयल महंगा हुआ। सोयाबीन तेल के दाम दक्षिण अमेरिका में निर्यात कमी और अमेरिका में बायोफ्यूल मांग से बढ़े। सूरजमुखी तेल की कीमतें ब्लैक सी क्षेत्र में आपूर्ति कमी से ऊपर गईं।

मांस मूल्य सूचकांक में 0.4% की गिरावट दर्ज हुई, जो 124.2 से 123.8 अंक पर आया। ब्राजील से निर्यात बढ़ने से पोल्ट्री के दाम बढ़े। डेयरी उत्पादों में सबसे बड़ी 5% गिरावट आई, मक्खन और चीज की उपलब्धता से। स्किम्ड मिल्क पाउडर मजबूत रहा, पश्चिम एशिया और अफ्रीका से मांग बढ़ने से। चीनी सूचकांक में 1% की कमी आई, 90.7 से 89.8 अंक पर। भारत, थाईलैंड और ब्राजील में उत्पादन बढ़ोतरी से आपूर्ति मजबूत हुई।

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कुल मिलाकर, वैश्विक बाजार में राहत के संकेत हैं, लेकिन तेल और चावल की महंगाई चुनौती बनी रह सकती है। मौसम, उत्पादन और मांग आने वाले महीनों में कीमतों की दिशा तय करेंगे। भारत समेत दुनिया भर में महंगाई झेल रहे करोड़ों लोगों के लिए यह थोड़ी राहत है।

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