नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सोमवार सुबह हवा की गुणवत्ता फिर से चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के अधिकांश इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया, जो 300 से 400 के बीच रहा। हालांकि, नरेला और रोहिणी जैसे कुछ क्षेत्रों में AQI ‘गंभीर’ कैटेगरी में पहुंच गया, जहां यह 400 के पार चला गया।
सुबह 8 बजे नरेला का AQI 405 और रोहिणी का 404 रहा, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।सीपीसीबी की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के मुताबिक, दिल्ली के विभिन्न इलाकों में हवा की स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। आनंद विहार में AQI 382, अशोक विहार में 390, बुराड़ी में 346, चांदनी चौक में 383, द्वारका सेक्टर-8 में 354, आईटीओ में 392, मुंडका में 392, नजफगढ़ में 321, ओखला फेज-2 में 354, आरके पुरम में 364 और वजीरपुर में 393 दर्ज किया गया।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि शहर के ज्यादातर हिस्सों में प्रदूषण का स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए।मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड बढ़ने के साथ वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, पराली जलाने और औद्योगिक उत्सर्जन जैसे कारक प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं।
रविवार रात से हवा की गति कम होने से स्मॉग की मोटी परत छा गई, जिससे AQI में और गिरावट आई। दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कुछ प्रतिबंध लागू किए हैं, लेकिन प्रभाव सीमित दिख रहा है।स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ‘बहुत खराब’ AQI से सांस की तकलीफ, आंखों में जलन और हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ‘गंभीर’ स्तर पर तो बाहर निकलना जोखिम भरा है।
लोगों को मास्क पहनने, घर के अंदर रहने और व्यायाम से परहेज करने की सलाह दी जा रही है।दिल्ली में प्रदूषण की यह समस्या हर साल दीवाली के बाद चरम पर पहुंच जाती है। इस बार भी पराली जलाने के धुएं ने योगदान दिया है। पंजाब और हरियाणा से आने वाला धुआं दिल्ली को घेर रहा है। पर्यावरण मंत्रालय ने सैटेलाइट इमेजरी से पराली जलाने के मामलों में कमी दर्ज की है, लेकिन स्थानीय स्रोत अभी भी प्रमुख हैं।
सरकार की ओर से odd-even योजना, निर्माण पर रोक और बस सेवाओं में बढ़ोतरी जैसे कदमों पर विचार हो रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक समाधान के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा, हरित क्षेत्र बढ़ाना और सख्त औद्योगिक नियमन जरूरी है।फिलहाल, दिल्लीवासी स्मॉग से जूझ रहे हैं। सीपीसीबी की वेबसाइट पर रीयल-टाइम अपडेट चेक करने की सलाह दी जा रही है। अगर AQI में सुधार नहीं हुआ तो GRAP-4 लागू हो सकता है, जिसमें ट्रकों की एंट्री पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल है।
