Skip to main content

environmentalstory

Home » चक्रवात ‘दाना’ से ओडिशा और पश्चिम बंगाल में अलर्ट, तटीय इलाकों में तेज़ हवाएं और भारी बारिश का खतरा

चक्रवात ‘दाना’ से ओडिशा और पश्चिम बंगाल में अलर्ट, तटीय इलाकों में तेज़ हवाएं और भारी बारिश का खतरा

by reporter
0 comment

नई दिल्ली: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हाल ही में बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम और मध्य भागों में रहने वाले लोगों के लिए चक्रवात ‘दाना’ को लेकर चेतावनी जारी की है। यह गंभीर चक्रवाती तूफान लगभग 12 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है और ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का कारण बना है।

चक्रवात ‘दाना’, जो आज रात तट से टकरा सकता है, फिलहाल बंगाल की खाड़ी के पूर्व-मध्य हिस्से के ऊपर मंडरा रहा है और इसके भितरकनिका नेशनल पार्क और धामरा बंदरगाह के बीच गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका है। इस दौरान हवा की गति 100-110 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है और हवा के झोंके 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकते हैं। यह एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात है, जिसे पृथ्वी के सबसे विनाशकारी तूफानों में से एक माना जाता है।

कैसे करें चक्रवात ‘दाना’ की लाइव ट्रैकिंग?

IMD संभावित चक्रवात से प्रभावित होने वाले लोगों को कुछ घंटों पहले ही सतर्क करता है, लेकिन इसका कोई वास्तविक समय का चक्रवात ट्रैकर नहीं है। हालांकि, कुछ तृतीय-पक्ष सेवाएं, जैसे Windy और Zoom Earth, चक्रवात के अनुमानित मार्ग के साथ-साथ उसकी गंभीरता को भी दिखाती हैं। Zoom Earth सेवा चक्रवात ‘डाना’ का मार्ग और हवा की गति भी दिखा रही है।

IMD की चेतावनी:

मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात ‘दाना’ का सबसे ज्यादा असर ओडिशा के जगतसिंहपुर, केंद्रापारा, भद्रक और बालासोर जिलों में पड़ेगा, जहां हवा की गति 100-120 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। वहीं पश्चिम बंगाल के पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, झारग्राम, कोलकाता, हावड़ा, हुगली और उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है।

banner

राहत और बचाव कार्य:

ओडिशा में अब तक 20 एनडीआरएफ टीमें, 51 ओड्राफ टीमें, 200 अग्निशमन सेवाएं और 158 पुलिस प्लाटून राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए तैनात की गई हैं। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन माजी ने कहा है कि कुछ ही घंटों में सभी प्रभावित क्षेत्रों से लोगों की निकासी पूरी कर ली जाएगी। 7,285 चक्रवात आश्रय स्थलों को तैयार किया गया है, जहां निकाले गए लोगों को सुरक्षित रखा जाएगा।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर चक्रवात का प्रभाव:

चक्रवात जैसे प्राकृतिक आपदाओं का पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। पर्यावरणीय प्रभाव के रूप में चक्रवात भारी बारिश, बाढ़, और तेज हवाओं के कारण पेड़ों और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाता है। मिट्टी का कटाव, समुद्र का जल स्तर बढ़ना, और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन पैदा होता है। इसके अलावा, चक्रवात के कारण समुद्री जीवन भी प्रभावित होता है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव की बात करें, तो चक्रवात के दौरान फैलने वाली बीमारियाँ, जैसे कि पानी जनित रोग, विशेष रूप से डायरिया, टाइफॉइड, और हैजा का खतरा बढ़ जाता है। बाढ़ और गंदगी के कारण पानी की गुणवत्ता खराब हो जाती है, जिससे संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा, चक्रवात के कारण मानसिक तनाव और आघात भी लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

निष्कर्ष:

चक्रवात ‘दाना’ से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य और केंद्र सरकारें बचाव कार्यों के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, लेकिन पर्यावरण और मानव जीवन पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए, आने वाले दिनों में पुनर्वास और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत बढ़ सकती है।

You may also like