देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। 10 जनवरी 2026 को जारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 351 दर्ज किया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा से 600 प्रतिशत अधिक है। यह शहर देश का सबसे प्रदूषित बना हुआ है, जहां पीएम10 जैसे महीन कण हवा में हावी हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। कल गाजियाबाद का AQI 347 था, यानी प्रदूषण में चार अंकों की वृद्धि हुई है।
दिल्ली में भी हालात चिंताजनक हैं, जहां AQI 346 पहुंच गया है, जो कल के 345 से एक अंक अधिक है। यहां भी प्रदूषण WHO मानकों से 600 प्रतिशत ज्यादा है। इससे पहले 14 नवंबर 2025 को दिल्ली का सबसे प्रदूषित दिन रहा था, जब AQI 461 तक पहुंचा। एनसीआर के अन्य शहरों में गुरुग्राम (349) दूसरे, नोएडा (348) तीसरे और दिल्ली चौथे स्थान पर है।
ग्रेटर नोएडा (338), नारनौल (322), टोंक (322), सीकर (314), बूंदी (292) और धारूहेड़ा (291) जैसे शहर टॉप-10 सबसे प्रदूषित में शामिल हैं। हरियाणा और उत्तर प्रदेश से तीन-तीन शहर इस सूची में हैं। फरीदाबाद में AQI 197 है, जो अपेक्षाकृत बेहतर लेकिन अभी भी मध्यम श्रेणी में है।
इसके विपरीत, शिलांग की हवा देश में सबसे साफ है, जहां AQI मात्र 9 दर्ज किया गया। गाजियाबाद की तुलना में यहां स्थिति 38 गुना बेहतर है। देशभर के 247 शहरों के विश्लेषण से पता चला कि केवल 4.9 प्रतिशत शहरों में हवा साफ है, 28.3 प्रतिशत में संतोषजनक, जबकि 66.8 प्रतिशत में चिंताजनक हालात हैं। कल से साफ हवा वाले शहरों में 71.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, लेकिन खराब श्रेणी में 34.6 प्रतिशत इजाफा चिंता का विषय है। बेहद खराब श्रेणी में कोई बदलाव नहीं आया।
रुझानों से सामने आया कि कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 जैसे प्रदूषक प्रमुख हैं। गुरुग्राम, नोएडा, भोपाल, कानपुर, कोलकाता आदि में पीएम2.5 हावी है, जबकि गाजियाबाद, दिल्ली, आगरा, लखनऊ, मुंबई आदि में पीएम10 से स्थिति खराब है। कुछ जगहों पर कार्बन और ओजोन भी समस्या बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में पराली जलाना, वाहन उत्सर्जन और निर्माण कार्य प्रमुख कारण हैं। सरकार को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है, अन्यथा स्वास्थ्य संकट गहरा सकता है।
