मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की एकमात्र नदी, कलियासोत, कभी इस शहर की जीवनरेखा थी। लेकिन आज यह नदी धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। इसकी जमीन पर बिल्डरों ने अवैध कब्जा कर लिया है और आम लोगों को रिवर व्यू का लालच देकर ठग रहे हैं। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि कैसे यह ठगी का खेल चल रहा है, नदी की बर्बादी हो रही है, और सिस्टम इस पर चुप क्यों है।
कलियासोत का दर्द
कभी थी जीवनदायिनी: कलियासोत नदी भोपाल के लिए पानी, हरियाली और जीवन का स्रोत थी। लेकिन अब यह कंक्रीट के जंगल में दब रही है।
अतिक्रमण का सिलसिला: 2014 में जब इस नदी का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में पहुंचा, तो लोगों को उम्मीद थी कि अब नदी को बचाने के लिए कुछ होगा। लेकिन इसके बाद भी अतिक्रमण रुका नहीं। हर महीने नई इमारतें, हर हफ्ते नए निर्माण, और हर दिन नदी की जमीन पर कब्जा बढ़ता गया।
न्याय की हार: NGT ने कई बार आदेश दिए, लेकिन आज तक एक भी बड़ा अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका। बिल्डरों को न तो कानून का डर है और न ही सजा का खौफ।
ठगी का पूरा खेल
बिल्डर, सरकारी विभाग, और बैंक मिलकर एक ऐसा जाल बुनते हैं, जिसमें आम आदमी फंस जाता है। इसका एक उदाहरण है बावड़ियाकला में आकृति रिट्रिट प्रोजेक्ट। यहां जानिए कैसे यह ठगी होती है:
लालच का जाल:
बिल्डर अर्पित जैन इस इलाके में 1200 वर्ग फीट के प्रीमियम बंगले बना रहे हैं। कीमत? 2.51 करोड़ रुपये!
खरीदारों को लुभाने के लिए रिवर व्यू का वादा किया जाता है। लेकिन यही रिवर व्यू पहले सैकड़ों लोगों को ठगी का शिकार बना चुका है।
लोग सोचते हैं कि ढाई करोड़ में नदी के किनारे बंगला और हरियाली मिलेगी, लेकिन उन्हें नहीं पता कि यह सब अवैध है।
कानून की धज्जियां:
नियम कहता है कि नदी के दोनों किनारों पर 33 मीटर का इलाका हरियाली के लिए छोड़ना जरूरी है। इसे फुल टैंक लेवल (FTL) क्षेत्र कहते हैं।
लेकिन बिल्डर ने नदी के अंदर ही कंक्रीट की दीवार बना दी। इस दीवार को रिटेनिंग वॉल कहकर लोगों को बेवकूफ बनाया जाता है।
नदी की जमीन पर दिखावटी पौधे और घास लगाकर नकली गार्डन बनाया जाता है। इसे हरियाली का सबूत बताकर अनुमति ले ली जाती है।
सिस्टम की मिलीभगत:
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP): बिल्डर इस नकली गार्डन को 10% खुली जगह बताकर नक्शा पास करवा लेता है। नियम कहता है कि खुली जगह अपनी जमीन से देनी है, नदी की जमीन से नहीं। लेकिन T&CP आंखें मूंद लेता है।
नगर निगम: T&CP के नक्शे के आधार पर निर्माण की अनुमति दे देता है। इस तरह दोनों विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं।
बैंक: जब T&CP और नगर निगम के कागजात दिखाए जाते हैं, तो बैंक भी प्रोजेक्ट को मंजूरी दे देता है और लोन दे देता है।
आम आदमी की हालत:
खरीदार को लगता है कि सब कुछ कानूनी है। नक्शा पास है, बैंक ने लोन दे दिया है, और रिवर व्यू भी मिलेगा।
वह ढाई करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करके बंगला खरीद लेता है। लेकिन उसे नहीं पता कि यह बंगला नदी के अवैध क्षेत्र में बना है।
