हिंदुकुश हिमालय क्षेत्र की बर्फ अब तेजी से गायब हो रही है। आईआईटी जम्मू और आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों का नया शोध ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है जिसमें चेतावनी दी गई है कि इस क्षेत्र में “स्नो ड्राउट” यानी असामान्य रूप से कम हिमपात की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
इससे सिंधु से मेकांग तक की दस प्रमुख नदियों पर निर्भर करीब 200 करोड़ लोगों की जल सुरक्षा गंभीर खतरे में है, जिनमें भारत की गंगा और ब्रह्मपुत्र भी शामिल हैं।
शोध में 1999-2016 तक के सैटेलाइट डेटा के आधार पर पाया गया कि अफगानिस्तान के अमु दरिया, ऊपरी सिंधु और उत्तर-पश्चिमी बेसिन में सबसे अधिक (25 बार तक) स्नो ड्राउट दर्ज हुए।
गंगा-ब्रह्मपुत्र जैसे बेसिनों में भी पिछले दो दशकों में हिमाच्छादित दिन औसतन 15 तक कम हो गए। 3,000-6,000 मीटर की ऊंचाई पर तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बर्फ की जगह बारिश होने लगी है और मौसमी जल भंडारण घट रहा है।
आईआईटी जम्मू के शोधकर्ता हेमंत सिंह ने कहा, “हिमाच्छादित दिनों में कमी और तेज हिमपिघलन स्नो ड्राउट के प्रमुख कारण हैं।” आईसीआईएमओडी के विशेषज्ञ शेर मुहम्मद के अनुसार, सिंधु बेसिन में कुल बहाव का 40% और हेलमंद में 70% से अधिक पानी मौसमी हिमगलन से आता है, जो हिमनदों से सात गुना ज्यादा है।
वैज्ञानिकों ने चेताया कि हिमनदों का पीछे हटना धीमा खतरा है, लेकिन स्नो ड्राउट अचानक “नल बंद” करने जैसा है। यदि यही ट्रेंड रहा तो आने वाले दशकों में हिमालय का “एशिया का जल मीनार” का दर्जा खत्म हो सकता है। शोधकर्ताओं ने नीति-निर्माताओं से हिम को रणनीतिक जल संपदा मानकर इसके संरक्षण और एकीकृत क्रायोस्फियर प्रबंधन की तत्काल जरूरत पर जोर दिया है।
