Air Pollution News: 25 जनवरी 2026 को भारत के विभिन्न शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश का सिंगरौली देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 346 तक पहुंच गया। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षित सीमा से 2,200 फीसदी अधिक है। कल के 289 की तुलना में 57 अंकों की बढ़ोतरी के साथ, सिंगरौली की हवा ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। यहां पीएम2.5 कणों का प्रभुत्व है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं।
इसके विपरीत, कर्नाटक का चिक्कमगलुरु सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई मात्र 26 दर्ज किया गया। सिंगरौली की तुलना में यहां स्थिति 13 गुना बेहतर है। दिल्ली में भी प्रदूषण में सुधार हुआ; कल के 192 से घटकर एक्यूआई 153 पर पहुंचा, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में है। 2025 में दिल्ली का सबसे प्रदूषित दिन 14 नवंबर को था, जब एक्यूआई 461 पहुंचा। फरीदाबाद में एक्यूआई 134 (-72) रिकॉर्ड हुआ, जो कल से बेहतर है।
242 शहरों के विश्लेषण से पता चला कि केवल 7.4% शहरों में हवा साफ है, 31.8% में संतोषजनक, जबकि 60.7% में चिंताजनक स्थिति है। कल से साफ हवा वाले शहरों में 28.6% बढ़ोतरी हुई, लेकिन बेहद खराब वाले शहरों में 100% इजाफा दर्ज हुआ। खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की संख्या स्थिर रही।
देश के टॉप 10 सबसे प्रदूषित शहरों में सिंगरौली (346) पहले, उज्जैन (338) दूसरे, पीथमपुर (285) तीसरे, अंगुल (283) चौथे, बिलीपाड़ा (259) पांचवें, कटक (245) छठे, भोपाल (242) सातवें, बल्लभगढ़ (239) आठवें, मंडीदीप (229) नौवें और आसनसोल (226) दसवें स्थान पर हैं। इनमें मध्य प्रदेश के पांच और ओडिशा के दो शहर शामिल हैं। कल अंगुल सबसे प्रदूषित था (309), लेकिन आज 71 अंकों के सुधार के साथ चौथे स्थान पर खिसक गया।
कई शहरों जैसे पीथमपुर, भोपाल, कोलकाता, गुरुग्राम, पटना, लखनऊ आदि में पीएम2.5 कण हावी हैं, जो श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन और निर्माण कार्य प्रमुख कारक हैं। सरकार को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है, ताकि प्रदूषण नियंत्रित हो सके।
