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क्या पुणे डूबने वाला है? MERI रिपोर्ट ने बढ़ते बाढ़ स्तर की चेतावनी दी, सभी शहरों को सतर्क रहने की जरूरत

by kishanchaubey
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क्या पुणे डूबने वाला है? MERI रिपोर्ट ने बढ़ते बाढ़ स्तर की चेतावनी दी, सभी शहरों को सतर्क रहने की जरूरतने चौंकाने वाली जानकारी दी है कि पुणे का बाढ़ स्तर पहले से कई गुना बढ़ चुका है। यह एक बड़ा खतरा है, जिसे अब अनदेखा नहीं किया जा सकता।

MERI रिपोर्ट में क्या कहा गया है? रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे की मुथा नदी का बाढ़ स्तर अब 1,07,724 क्यूसेक्स हो गया है, जो पहले सिर्फ 60,000 क्यूसेक्स था। इसी तरह, मूला नदी का बाढ़ स्तर 98,755 क्यूसेक्स है, जबकि पहले यह 54,236 क्यूसेक्स था। इन दोनों नदियों का संयुक्त बाढ़ स्तर अब 1,68,000 क्यूसेक्स हो चुका है। यह आंकड़े इसलिए बढ़े हैं क्योंकि पहले के बाढ़ स्तर सिर्फ डैम के पानी पर आधारित थे, जबकि अब नालों और ड्रेनेज सिस्टम से आने वाला पानी भी इस गणना में शामिल किया गया है। इस बदलाव ने असली खतरे को उजागर किया है।

क्या खतरे हैं? बाढ़ की स्थिति में पुणे का बड़ा हिस्सा पानी में डूब सकता है। नदी किनारे बसे कई इलाके बाढ़ के पानी से प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि यहां अवैध निर्माण हो चुके हैं और मलबा खुलेआम नदियों में फेंका जा रहा है। राज्य और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के कारण स्थिति और बिगड़ रही है।

क्या पहले से इस खतरे का आभास था? एक पर्यावरण कार्यकर्ता, सरंग यदवडकर ने पहले ही पुणे के बाढ़ स्तरों और Riverfront Development Project के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने इस मामले की समीक्षा करने का आदेश दिया था, जिसके बाद MERI ने यह रिपोर्ट तैयार की। अब यह रिपोर्ट सरकार को चेतावनी दे रही है कि अगर जल्द कोई कदम नहीं उठाए गए, तो पुणे शहर की बर्बादी तय है।

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भारत के अन्य शहरों में भी यही स्थिति यह सिर्फ पुणे की कहानी नहीं है। देश के अन्य बड़े शहरों—जैसे दिल्ली, मुंबई, भोपाल और इंदौर—में भी यही हालात हैं। दिल्ली की यमुना नदी और मुंबई की मीठी नदी हर मानसून में तबाही मचाती हैं। ये नदियां अब जल स्रोत नहीं बल्कि कचरे और मलबे के डंपिंग ग्राउंड बन चुकी हैं। भोपाल के बड़े तालाब और इंदौर की खान नदी में भी यही समस्या है—यहां पानी के स्रोतों में मलबा और कचरा जमा हो रहा है, जिससे पर्यावरण और हमारे जीवन दोनों को खतरा हो रहा है।

ड्रेनेज सिस्टम की गंभीर समस्या भारत के अधिकांश शहरों में ड्रेनेज सिस्टम की स्थिति बेहद खराब है। शहर के नालों और जल निकासी मार्गों पर कब्जा किया जा रहा है, जिसके कारण पानी का प्रवाह रुक जाता है। कई नदियों पर अतिक्रमण के कारण उनका पानी समुद्र तक नहीं पहुंच पाता, जिससे बरसाती पानी शहर में ही जमा हो जाता है और बाढ़ की स्थिति पैदा होती है।

अतिक्रमण और जल निकासी की समस्या का उदाहरण: 11 नवंबर 2021 को चेन्नई शहर में आई बाढ़ एक बड़ा उदाहरण है। अतिक्रमण के कारण शहर के नालों में पानी का बहाव रुक गया, और भारी बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि शहर में नाव चलानी पड़ी।

क्या सरकार सुन रही है? क्या किसी विकसित देश के महानगर की ऐसी हालत हो सकती है? क्या प्रशासन इस खतरे को गंभीरता से ले रहा है? पुणे, दिल्ली, मुंबई, भोपाल—हर शहर में जल निकासी पर अवैध निर्माण हो रहे हैं और मलबा नदियों, तालाबों में डाला जा रहा है। अगर अब भी कदम नहीं उठाए गए, तो पुणे में एक बड़ी त्रासदी हो सकती है।

क्या करें? हमें अपने शहर के ड्रेनेज सिस्टम को अतिक्रमण से बचाना होगा। नालों और नदियों के दोनों किनारों पर हरियाली बढ़ानी होगी और सघन वन रोपण करना होगा। इसके अलावा, प्रशासन से यह सुनिश्चित करवाना होगा कि कचरा और मलबा नदियों और तालाबों में न डाला जाए।

अगर हम अब भी इसे नजरअंदाज करते हैं, तो बाढ़ की तबाही केवल खबर नहीं, हमारी हकीकत बन जाएगी।

आपका शहर कैसा है? क्या आपके शहर में भी जल निकासी और नदियों की स्थिति खराब है? कृपया कमेंट करके बताइए और इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर हमारी आवाज बनिए।

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