Israel-Gaza War: एक नए वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक, इस्राइल-गाजा युद्ध से अब तक करीब 3.3 करोड़ मीट्रिक टन (33 मिलियन टन) कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष (CO₂e) उत्सर्जन हो चुका है। यह आंकड़ा जॉर्डन के 2024 के पूरे साल के कुल कार्बन उत्सर्जन के बराबर है, लगभग 76 लाख पेट्रोल-डीजल कारों के एक साल के उत्सर्जन जितना है और 3.31 करोड़ एकड़ जंगलों द्वारा एक वर्ष में सोखे जाने वाले कार्बन के समान है।
यह अध्ययन, जर्नल ‘वन अर्थ’ में प्रकाशित, क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के नेतृत्व में और लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया। प्रमुख लेखक डॉ. बेंजामिन नीमार्क के अनुसार, सैन्य अभियानों से ही 13 लाख मीट्रिक टन से अधिक CO₂e निकला, जिसमें तोपखाने, रॉकेट और अन्य उपकरण शामिल हैं।
कुल उत्सर्जन में सुरक्षा ढांचे (जैसे रक्षात्मक दीवारें), युद्धकालीन गतिविधियां और पुनर्निर्माण (सड़कें, इमारतें, बुनियादी ढांचा) की बड़ी भूमिका है।शोधकर्ता डॉ. फ्रेडरिक ओटू-लार्बी ने कहा कि युद्ध के पर्यावरणीय प्रभावों को मापना दुर्लभ है, लेकिन हर चरण—सक्रिय संघर्ष से लेकर पुनर्निर्माण तक—भारी ग्रीनहाउस गैसें पैदा करता है।
समस्या यह है कि सैन्य उत्सर्जन अंतरराष्ट्रीय जलवायु रिपोर्टिंग (जैसे UNFCCC) में लगभग शामिल नहीं होता, जिससे युद्धों का वास्तविक जलवायु प्रभाव छिपा रह जाता है।अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि सैन्य गतिविधियों की पारदर्शी रिपोर्टिंग अनिवार्य हो, ताकि युद्धों के छिपे पर्यावरणीय नुकसान को समझा और रोका जा सके। यह न केवल मानवीय त्रासदी है, बल्कि जलवायु परिवर्तन को तेज करने वाला बड़ा कारक भी है, जो वैश्विक स्तर पर ध्यान देने की मांग करता है।
