उत्तर भारत में सर्दी के साथ प्रदूषण का कहर फिर शुरू हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, 4 जनवरी को गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 333 तक पहुंच गया, जो इसे देश का सबसे प्रदूषित शहर बनाता है। यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा से 2000 प्रतिशत अधिक है, जहां PM2.5 कण हावी हैं। कल (3 जनवरी) यहां AQI 244 था, यानी 89 अंकों का उछाल। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्तर सांस, हृदय रोगों और कैंसर का गंभीर खतरा पैदा करता है।
दिल्ली की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां AQI 307 दर्ज किया गया—कल के 267 से 40 अंकों की बढ़ोतरी। इससे राजधानी ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। NCR क्षेत्र में धारूहेड़ा (322) दूसरे, ग्रेटर नोएडा (316) तीसरे और दिल्ली-नोएडा चौथे स्थान पर हैं। गाजियाबाद (298) और बालासोर (306) क्रमशः पांचवें-छठे स्थान पर हैं। नारनौल (296), कटक (277), भिवाड़ी (274) और देहरादून (271) भी टॉप-10 प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। हरियाणा (गुरुग्राम, धारूहेड़ा, नारनौल) और उत्तर प्रदेश (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद) के तीन-तीन शहरों का दबदबा है। फरीदाबाद में AQI 215 रहा, जो ‘खराब’ श्रेणी में है।
244 शहरों के विश्लेषण में केवल 2.5 प्रतिशत (6 शहर) में हवा साफ (AQI 0-50) रही। शिलांग सबसे साफ (AQI 11) रहा, जहां गुरुग्राम से स्थिति 29 गुना बेहतर है। अन्य साफ शहर: चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दमोह, गुवाहाटी, विजयपुरा। 31.1 प्रतिशत (76 शहर) में संतोषजनक (51-100) स्थिति रही, जैसे जबलपुर, जालंधर, पटना। 50.4 प्रतिशत (123 शहर) में मध्यम (101-200), जिसमें मुंबई (140), लखनऊ (180), जयपुर (174) शामिल हैं।
चिंताजनक बात: 66.4 प्रतिशत शहरों में हालात ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ हैं। 33 शहरों में खराब (201-300), जैसे ग्वालियर (230), कोलकाता। 6 शहरों में बेहद खराब (301-400): गुरुग्राम, दिल्ली, धारूहेड़ा, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, बालासोर। कल से साफ शहरों में 20 प्रतिशत इजाफा हुआ, लेकिन बेहद खराब शहरों में 50 प्रतिशत वृद्धि चिंता बढ़ा रही है।
AQI पैमाने के अनुसार, 301-400 स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है, जबकि 401+ गंभीर। विशेषज्ञों ने मास्क, इंडोर रहने और GRAP-3 लागू करने की सलाह दी है। क्या सरकार ठोस कदम उठाएगी?
