Gangotri Gratitude: उत्तराखंड के गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण को लेकर बड़ा विवाद चल रहा है। चार धाम ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत झाला से भैरोंघाटी तक के 20 किलोमीटर ईको-सेंसिटिव जोन में शुरू में 6,822 पेड़ प्रभावित होने का अनुमान था। वन विभाग के नवंबर 2025 के प्रस्ताव में 4,366 पेड़ों को ट्रांसलोकेट (दूसरी जगह लगाना) और 2,456 को काटने की बात थी, जिस पर 323 लाख रुपये खर्च अनुमानित था।
हालांकि, पर्यावरणविदों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद बीआरओ ने योजना संशोधित की। दिसंबर 2025 में सड़क चौड़ाई 12 मीटर से घटाकर 11 मीटर करने पर सहमति बनी, जिससे अब केवल 1,413 पेड़ काटे जाएंगे और शेष को ट्रांसलोकेट किया जाएगा। बीआरओ कमांडेंट राज किशोर ने कहा कि नदी की ओर कॉरीडोर बनाकर पहाड़ कटाई कम की जाएगी।
विरोध पक्ष में पर्यावरण कार्यकर्ता हेमंत ध्यानी ने ‘रक्षा सूत्र अभियान’ चलाया, जिसमें 6 दिसंबर को पेड़ों पर सूत्र बांधे गए। पूर्व मंत्री मुरली मनोहर जोशी, कर्ण सिंह और वैज्ञानिकों का समर्थन मिला। विशेषज्ञों जैसे डॉ. नवीन जुयाल और एसपी सती का तर्क है कि हिमालयी नाजुक ढलानों पर बड़े कटान से भूस्खलन बढ़ेंगे, देवदार पेड़ मिट्टी बांधते हैं। वे इंटरमीडिएट विड्थ (5.5 मीटर) की सलाह देते हैं।
दूसरी ओर, धराली जैसे गांवों के स्थानीय लोग विकास चाहते हैं। प्रधान अजय नेगी ने कहा कि ट्रैफिक जाम खत्म करने के लिए चौड़ीकरण जरूरी है, लेकिन फोर-लेन नहीं। कुछ ग्रामीणों ने पर्यावरणविदों के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।
यह प्रोजेक्ट धराली आपदा (अगस्त 2025) के बाद और विवादित हुआ। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अत्यधिक कटान से नए लैंडस्लाइड जोन बन सकते हैं। अब संख्या कम होने से राहत है, लेकिन वैज्ञानिक सिफारिशें लागू करने की मांग बरकरार है।
