भारत के जंगलों में छोटी जंगली बिल्लियों (small wild cats) पर पहली बार ऐसा बड़ा राष्ट्रीय अध्ययन हुआ है। वन्यजीव संस्थान (WII) और राष्ट्रीय टाइगर संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की रिपोर्ट “Status of Small Cats in Tiger Landscapes of India” (जुलाई 2025 में जारी) टाइगर अनुमान (2018 और 2022) के कैमरा ट्रैप डेटा पर आधारित है।
इसमें 18 राज्यों के 57,000+ कैमरा स्थलों से छोटी बिल्लियों की उपस्थिति का आकलन किया गया।रिपोर्ट में मुख्य रूप से जंगली बिल्ली (Jungle Cat – Felis chaus) को सबसे व्यापक प्रजाति बताया गया है।
यह लगभग 96,275 वर्ग किमी क्षेत्र में पाई जाती है (95% CI: 90,075-98,100), जो सूखे से नम पर्णपाती जंगलों, घास के मैदानों, वेटलैंड्स और कृषि क्षेत्रों तक फैली है। राजस्थान के थार मरुस्थल, मध्य प्रदेश के सतपुड़ा, कान्हा, पन्ना जैसे संरक्षित क्षेत्र और मध्य भारत में इसकी सबसे ज्यादा उपस्थिति है। यह प्रजाति मानवीय गड़बड़ी सहन करने में सक्षम है, लेकिन अन्य छोटी बिल्लियाँ (जैसे rusty-spotted cat) घट रही हैं।
कुछ मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स में कुल छोटी जंगली बिल्लियों की संख्या लगभग 3 लाख बताई गई है, लेकिन आधिकारिक WII रिपोर्ट में सटीक जनसंख्या नहीं, बल्कि व्याप्ति (occupancy) पर फोकस है।
एक अलग अध्ययन में भारत भर में जंगली बिल्ली के संभावित क्षेत्र को 5,45,280 वर्ग किमी अनुमानित किया गया है, जो बड़ी आबादी का संकेत देता है। ये बिल्लियाँ इकोसिस्टम की ‘सिपाही’ हैं—चूहे, छोटे पक्षी, सरीसृप और कीटों का शिकार कर चूहों की संख्या काबू में रखती हैं, जिससे फसलें सुरक्षित रहती हैं और जैव विविधता संतुलित होती है।
IUCN रेड लिस्ट में जंगली बिल्ली को Least Concern (कम चिंताजनक) माना गया है, लेकिन आवास नुकसान, सड़क निर्माण, खेती विस्तार, रोडकिल, अवैध शिकार और घरेलू बिल्लियों से हाइब्रिडाइजेशन से खतरा बढ़ रहा है।
दुनिया में घरेलू और जंगली बिल्लियों की कुल संख्या 200-600 मिलियन है, लेकिन भारत की ये स्वदेशी जंगली बिल्लियाँ हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं। अगर संख्या और घटी, तो छोटे शिकारियों का बैलेंस बिगड़ेगा और खाद्य श्रृंखला प्रभावित होगी।
रिपोर्ट संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है—संरक्षित क्षेत्र मजबूत करने, स्थानीय समुदायों को शामिल करने, अवैध व्यापार रोकने और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की जरूरत है। यह अध्ययन बताता है कि टाइगर के साथ छोटी बिल्लियाँ भी सुरक्षित रहें, तभी जंगल स्वस्थ रहेंगे।
