आजकल रसोई गैस की कीमतों में तेजी से उछाल आया है, जिसने घरेलू बजट पर भारी असर डाला है। मार्च 2026 में दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹913 तक पहुंच गई है, जो पिछले महीने से ₹60 की बढ़ोतरी दर्शाती है। यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष से जुड़ी है, जिसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावित किया है।
दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस इसी संकरी जलडमरूमध्य से गुजरता है। संघर्ष के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं, यहां तक कि कुछ समय के लिए $106-120 के स्तर तक पहुंचीं, जिससे भारत में एलपीजी की उपलब्धता और कीमतें प्रभावित हुई हैं।पर्यावरण के नजरिए से देखें तो गैस चूल्हा जलाने से सीधे ग्रीनहाउस गैसें और अन्य प्रदूषक निकलते हैं, जो घर की हवा को दूषित करते हैं और ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देते हैं।
वहीं, इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हा पूरी तरह साफ-सुथरा विकल्प है – इसमें कोई धुआं या हानिकारक उत्सर्जन नहीं होता। ऊर्जा दक्षता की बात करें तो इंडक्शन करीब 90% ऊर्जा का उपयोग खाना पकाने में करता है, जबकि गैस चूल्हे में सिर्फ 50% ऊर्जा काम आती है और बाकी आधी हवा में बर्बाद हो जाती है।आर्थिक रूप से भी इंडक्शन फायदेमंद साबित हो रहा है।
एक सिलेंडर के बराबर खाना पकाने में इंडक्शन पर औसतन 70-80 यूनिट बिजली लगती है। यदि बिजली ₹8 प्रति यूनिट मानें, तो कुल खर्च ₹560-640 के बीच आता है। इस तरह एक सिलेंडर पर ₹250-350 तक की बचत संभव है। वर्तमान संकट में जहां एलपीजी महंगा और कभी-कभी उपलब्धता प्रभावित हो रही है, इंडक्शन अपनाना गैस पर निर्भरता कम करने का बेहतरीन तरीका है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैश्विक ऊर्जा संकट लंबा खिंच सकता है, इसलिए अब समय है कि परिवार इलेक्ट्रिक इंडक्शन की ओर रुख करें। इससे न केवल पैसे की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित होगा और घरेलू ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनेगी।
