Delhi Air Pollution News: नया साल शुरू होते ही दिल्ली की हवा फिर से जहर बन गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 380 दर्ज किया गया, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। यह ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है, जहां पीएम2.5 कणों की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा से 2,300 प्रतिशत अधिक है।
कल के 373 AQI से सात अंकों की बढ़ोतरी हुई है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये महीन कण फेफड़ों और हृदय को नुकसान पहुंचा सकते हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के दमोह शहर ने राहत दी, जहां AQI महज 30 रहा—’अच्छा’ स्तर। दिल्ली की तुलना में यहां स्थिति 12 गुना बेहतर है। 240 शहरों के विश्लेषण से पता चला कि केवल 1.3 प्रतिशत (तीन शहर) में हवा साफ है, जिसमें आइजोल और विजयपुरा भी शामिल हैं। 21.3 प्रतिशत शहरों में स्थिति संतोषजनक रही, जैसे चेन्नई, मुंबई, हैदराबाद और पुणे। लेकिन चिंता की बात यह है कि 77.5 प्रतिशत (लगभग 186 शहर) में हालात चिंताजनक हैं।
कल से साफ हवा वाले शहरों में 25 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि ‘बेहद खराब’ शहरों में 25 प्रतिशत इजाफा हुआ। प्रदूषण की होड़ में नोएडा (367) दूसरे, गाजियाबाद (356) तीसरे, ग्रेटर नोएडा (352) चौथे स्थान पर हैं। उत्तर प्रदेश के चार शहर—नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और बागपत (349)—टॉप-10 में शुमार हैं। अन्य प्रदूषित शहरों में पानीपत (347), चित्तूर (339), बालासोर (337), धारूहेड़ा (331) और बारीपदा (319) शामिल हैं। फरीदाबाद का AQI 234 रहा। ओडिशा के दो शहर भी सूची में हैं।
कई शहरों में पीएम2.5 हावी है, जैसे मेरठ, गुरुग्राम, इंदौर। वहीं, पीएम10 से प्रभावित हैं धनबाद, पटियाला, सूरत। संतोषजनक हवा वाले 51 शहरों में बरेली, गुवाहाटी, मैसूर प्रमुख हैं। मध्यम श्रेणी के 124 शहरों में आगरा, बेंगलुरु, जयपुर, लखनऊ शामिल।
यह स्थिति 14 नवंबर 2025 के 461 AQI रिकॉर्ड की याद दिलाती है। सरकार ने GRAP-3 लागू किया है, लेकिन विशेषज्ञ लंबे समाधान की मांग कर रहे हैं।
