राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) को अधिक प्रभावी बनाने के लिए समता संकेतक जोड़ने, डेटा शैडो क्षेत्रों में सैटेलाइट व सेंसर-आधारित निगरानी अपनाने और हॉटस्पॉट एक्शन प्लान को समुदाय-केंद्रित बनाने की सख्त जरूरत है। इससे गरीब व कमजोर लोग, जो प्रदूषण स्रोतों के निकट रहते हैं, सबसे अधिक लाभान्वित होंगे।
वर्तमान में एनसीएपी शहरों में प्रगति मापने के संकेतक हैं, लेकिन इनमें कमजोर समुदायों की संवेदनशीलता व बड़ी परियोजनाओं के प्रभाव का आकलन नहीं होता। आजीविका पर कम असर वाले उपाय व सुरक्षा प्रावधान जरूरी हैं। देश में 931 मैनुअल व 516 रियल-टाइम सीएएक्यूएम स्टेशन हैं, पर बड़े इलाके डेटा-शैडो में हैं। औद्योगिक क्षेत्र, झुग्गियां, ट्रैफिक हॉटस्पॉट व संवेदनशील जगहों पर वैकल्पिक निगरानी अपनानी चाहिए। सीपीसीबी ने सेंसर की इजाजत दी, लेकिन कानूनी उपयोग नहीं। सैटेलाइट से सटीक मैपिंग व जन जागरूकता बढ़ाएं।
दिल्ली के 18 हॉटस्पॉट जैसे ओखला, बवाना, आनंद विहार में स्रोत-आधारित योजनाएं हैं, पर समुदायों के एक्सपोजर व लाभ का आकलन अनुपस्थित। वायु प्रदूषण अधिनियम 1981 सघनता पर फोकस करता है, एक्सपोजर प्रबंधन की ओर बढ़ें। मुंडका में कचरा जलाने पर रोक से लाभ हुआ, लेकिन शहर-स्तरीय हस्तक्षेप जरूरी।
परिवहन योजनाओं में पैदल-साइकिल सुविधाएं व किफायती बसें शामिल करें। दिल्ली में 34% आबादी सस्ती बसों से वंचित। मेट्रो-बीआरटी से विस्थापन बढ़ा, आजीविका बाधित। टीओडी नीति से मिश्रित विकास व गरीब-अनुकूल गतिशीलता सुनिश्चित करें। नीतियां समावेशी बनें, ताकि स्वच्छ हवा सभी तक पहुंचे।
