एक नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर कैंसर की रोकथाम के लिए तत्काल और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक दुनिया भर में कैंसर के मामले 3.05 करोड़ तक पहुंच सकते हैं, और इस बीमारी से 1.86 करोड़ मौतें हो सकती हैं। विशेष रूप से कमजोर और मध्यम आय वाले देशों में कैंसर का बोझ तेजी से बढ़ रहा है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही दबाव में हैं।
बढ़ता कैंसर का बोझ: अंतरराष्ट्रीय जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, 2023 में दुनिया भर में 1.85 करोड़ लोगों को कैंसर हुआ, और 1.04 करोड़ लोगों की इस बीमारी से मृत्यु हुई। यह आंकड़े सामान्य त्वचा कैंसर (नॉन-मेलानोमा) को छोड़कर हैं।
चिंता की बात यह है कि 58% नए मामले और 66% मौतें कमजोर और मध्यम आय वाले देशों में दर्ज की गईं, जो पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से जूझ रहे हैं।
1990 से 2023 तक उछाल: 1990 से 2023 के बीच कैंसर के नए मामलों में 105% और मौतों में 74% की वृद्धि हुई है। हालांकि, आर्थिक रूप से समृद्ध देशों में उम्र के हिसाब से कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में 24% की कमी आई है, लेकिन गरीब और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में नए मामलों की दर क्रमशः 24% और 29% बढ़ी है।
2050 तक अनुमान: अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि 2050 तक कैंसर के नए मामलों में 60.7% और मौतों में 74.5% की वृद्धि हो सकती है। कमजोर और मध्यम आय वाले देशों में कैंसर से होने वाली मौतों में 91% तक की बढ़ोतरी का अंदेशा है, जबकि अमीर देशों में यह वृद्धि 43% रह सकती है। बढ़ती आबादी और उम्रदराज जनसंख्या इस वृद्धि का प्रमुख कारण है।
प्रमुख जोखिम कारक: 2023 में कैंसर से होने वाली 42% मौतें (लगभग 43 लाख) उन कारणों से हुईं, जिन्हें रोका जा सकता था। तंबाकू का उपयोग कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण रहा, जो वैश्विक स्तर पर 21% मौतों के लिए जिम्मेदार था।
इसके अलावा, असुरक्षित यौन संबंध, मोटापा, खराब खानपान और जीवनशैली भी प्रमुख जोखिम कारक रहे। कमजोर देशों में असुरक्षित यौन संबंध 12.5% मौतों का कारण बना। पुरुषों में तंबाकू, शराब, और वायु प्रदूषण, जबकि महिलाओं में तंबाकू, असुरक्षित यौन संबंध, मोटापा और हाई ब्लड शुगर प्रमुख जोखिम कारक रहे।
सबसे आम कैंसर: 2023 में स्तन कैंसर सबसे अधिक प्रचलित था, जबकि फेफड़ों का कैंसर मौतों का प्रमुख कारण रहा।विशेषज्ञों की चेतावनी: अमेरिकी विशेषज्ञ डॉ. लीजा फोर्स ने कहा, “कैंसर का बोझ, खासकर सीमित संसाधनों वाले देशों में, तेजी से बढ़ेगा।
कैंसर नियंत्रण को वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकता बनाना होगा।” नेपाल हेल्थ रिसर्च काउंसिल के डॉ. मेघनाथ धीमाल ने चेताया, “कमजोर देशों में कैंसर एक आने वाला संकट है। अगर अभी कदम न उठाए गए, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।”
रोकथाम की जरूरत: विशेषज्ञों ने जोर दिया कि कैंसर की रोकथाम, शुरुआती जांच, और इलाज की समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए हर देश को अपनी नीतियों को मजबूत करना होगा। इसके साथ ही, कैंसर से जुड़े आंकड़ों के लिए बेहतर निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।
संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य: संयुक्त राष्ट्र के 2030 तक गैर-संक्रामक बीमारियों से होने वाली असमय मौतों को एक-तिहाई कम करने के लक्ष्य से वैश्विक प्रगति पीछे है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकारें अभी निर्णायक कदम नहीं उठातीं, तो 2050 तक कैंसर एक वैश्विक महामारी बन सकता है।
