Mahakumbh 2025: प्रयागराज महाकुंभ 2025 में एक ओर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ गंगा, यमुना और त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगा रही है, वहीं दूसरी ओर नदियों की जल गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) को फटकार लगाते हुए कहा कि “आपने 50 करोड़ लोगों को गंदे और दूषित पानी से नहला दिया, जो स्नान करने लायक भी नहीं था!”
एनजीटी की सख्त टिप्पणी, यूपीपीसीबी पर सवाल
16 फरवरी 2025 को हुई सुनवाई में एनजीटी की प्रधान पीठ ने यूपीपीसीबी द्वारा ठोस रिपोर्ट न देने पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि “ऐसा लग रहा है कि आप किसी दबाव में काम कर रहे हैं।”
कोर्ट ने सवाल उठाया:
- मेला शुरू होने से पहले ही नदी में गंदे पानी के गिरने को रोकने के लिए कड़े कदम क्यों नहीं उठाए गए?
- क्यों अब तक सीवेज को सीधे गंगा में गिरने से नहीं रोका गया?
- 2019 में तय किए गए सख्त जल उपचार मानकों को क्यों लागू नहीं किया गया?
सीपीसीबी की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा – गंगा स्नान के दौरान पानी प्रदूषित था
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा 3 फरवरी 2025 को एनजीटी में पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि 12-13 जनवरी 2025 को हुई जल गुणवत्ता जांच में गंगा और यमुना के अधिकांश घाटों का पानी स्नान योग्य नहीं था।
रिपोर्ट में सात प्रमुख स्थानों के जल नमूनों का अध्ययन किया गया:
- श्रृंगवेरपुर घाट
- लॉर्ड कर्जन पुल
- शास्त्री पुल से पहले का क्षेत्र
- नागवासुकी मंदिर पंटून पुल (नंबर 15)
- संगम क्षेत्र
- डीहा घाट
- पुराना नैनी पुल (जहां यमुना गंगा में मिलती है)
इन जगहों पर पाए गए प्रमुख प्रदूषक:
- बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) सामान्य स्तर से अधिक था, जिससे पानी की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई।
- फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की अत्यधिक मात्रा पाई गई, जो मलजनित प्रदूषण का संकेत देती है और टाइफाइड, डायरिया, हैजा जैसे गंभीर जलजनित रोगों के खतरे को बढ़ा सकती है।
गंगा में बिना ट्रीटमेंट का सीवेज गिराया जा रहा है
CPCB रिपोर्ट और डाउन टू अर्थ की जांच में सामने आया कि प्रयागराज में हर दिन करीब 53 MLD (मिलियन लीटर प्रति दिन) सीवेज बिना उपचार के गंगा में मिल रहा है।
सभी 10 एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) अपनी क्षमता से अधिक सीवेज प्राप्त कर रहे हैं, जिससे वे प्रभावी रूप से गंदे पानी को शुद्ध नहीं कर पा रहे। पोंगघाट एसटीपी तो राहत मानकों को भी पूरा नहीं कर पा रहा है और यह संगम क्षेत्र से पहले गंगा में मिलता है।
गंगा में नालों का पानी सीधा मिल रहा है
डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रयागराज में कई जगहों पर नालों का पानी बिना ट्रीटमेंट के गंगा में गिर रहा है। जिन जगहों पर नालों को ट्रीट करने की व्यवस्था थी, वहां भी प्रक्रिया आंशिक रूप से ही प्रभावी रही।
एनजीटी ने यूपीपीसीबी से मांगी रिपोर्ट
16 फरवरी 2025 की सुनवाई में एनजीटी ने यूपीपीसीबी से गंगा में बढ़ते प्रदूषण और सीवेज ट्रीटमेंट से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा।
एनजीटी के आदेश:
- जल गुणवत्ता सुधार के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश।
- एसटीपी की कार्यक्षमता बढ़ाने पर रिपोर्ट पेश करने को कहा।
- गंगा में सीधे सीवेज गिरने से रोकने के लिए तुरंत समाधान प्रस्तुत करने का आदेश।
