Plastic Ban News: भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक (SUP) पर देशव्यापी प्रतिबंध लगे तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक बनी हुई है। पर्यावरण संगठन टॉक्सिक्स लिंक की नई रिपोर्ट “Revisiting Single Use Plastic Ban” के अनुसार, दिल्ली, मुंबई, भुवनेश्वर और गुवाहाटी के 560 स्थानों पर किए गए सर्वे में 84 प्रतिशत जगहों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक उत्पाद अभी भी इस्तेमाल और बिक्री में पाए गए।
सर्वे अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच किया गया। शहरवार आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं—भुवनेश्वर में 89%, दिल्ली में 86%, मुंबई में 85% और गुवाहाटी में 76% स्थानों पर उल्लंघन जारी है।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि समस्या सबसे ज्यादा छोटी दुकानों, स्ट्रीट वेंडर, जूस स्टॉल, सब्जी विक्रेताओं, आइसक्रीम पार्लर और साप्ताहिक बाजारों में है। पतले प्लास्टिक बैग, डिस्पोजेबल कप-प्लेट, स्ट्रॉ और कटलरी सबसे अधिक इस्तेमाल हो रहे हैं। वहीं मॉल और बड़े रिटेल स्टोर्स में नियमों का पालन 상대 कहीं बेहतर है।
टॉक्सिक्स लिंक के अनुसार, 91 प्रतिशत छोटे दुकानदारों ने स्वीकार किया कि ग्राहक आज भी प्लास्टिक बैग मांगते हैं। सस्ती उपलब्धता, कमजोर निगरानी और उपभोक्ताओं की पुरानी आदतें इस समस्या को लगातार बढ़ावा दे रही हैं। कई लोग डिस्पोजेबल प्लास्टिक को सुविधाजनक और हाइजीनिक मानते हैं, जबकि कागज, कपड़े के बैग या बैगास जैसे विकल्प महंगे लगते हैं।
टॉक्सिक्स लिंक के एसोसिएट डायरेक्टर सतीश सिन्हा ने कहा, “लोग अब भी डिस्पोजेबल चीजों को ज्यादा साफ और आसान मानते हैं। यही सोच बदलाव में सबसे बड़ी बाधा है।”
रिपोर्ट में सरकार, उद्योग और नागरिकों के लिए समाधान भी सुझाए गए हैं। इनमें सख्त निगरानी, नियमित जांच, उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई, छोटे दुकानदारों को आर्थिक सहायता और सस्ते पर्यावरण-अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराना शामिल है। साथ ही जनजागरूकता अभियानों को तेज करने की जरूरत बताई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ प्रतिबंध लगाना काफी नहीं। जब तक कड़ी अमल, सस्ते विकल्प और लोगों के व्यवहार में बदलाव नहीं होगा, तब तक प्लास्टिक प्रदूषण की लड़ाई जीतना मुश्किल रहेगा।
