नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देश के प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों में भूजल के निरंतर और अत्यधिक इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जाहिर की है। एनजीटी का मानना है कि कई बड़े स्टेडियम खेल मैदान की देखभाल और सिंचाई के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से शोधित पानी के बजाए भूजल का उपयोग कर रहे हैं, जो पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है। यह आदेश केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) की रिपोर्ट के आधार पर जारी किया गया है।
एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। पीठ ने सभी संबंधित स्टेडियमों को भूजल के अत्यधिक उपयोग पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, कई स्टेडियम अभी भी पिच और हरित क्षेत्र की सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भर हैं, जबकि उनके आसपास एसटीपी से शोधित अपशिष्ट जल उपलब्ध है।
उदाहरण के तौर पर, मोहाली के आई.एस. बिंद्रा स्टेडियम में प्रतिमाह लगभग 6,000 किलोलीटर भूजल का उपयोग हो रहा है। पीठ ने इस पर कड़ी टिप्पणी की और कहा कि उपलब्ध शोधित जल होने के बावजूद भूजल का इस्तेमाल पर्यावरणीय मानकों की अवहेलना है।
एनजीटी ने नागपुर, कोलकाता के ईडन गार्डन्स, लाहली, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी के स्टेडियमों को छह सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। इन स्टेडियमों को वैकल्पिक जल स्रोत अपनाने के उपायों की जानकारी भी पेश करनी होगी। इसके अलावा, दिल्ली, पुणे, जयपुर, हैदराबाद, कानपुर, लखनऊ, इंदौर, धर्मशाला, राजकोट, रायपुर, कटक और मुंबई के 12 स्टेडियमों एवं संघों पर लगातार आदेशों की अनदेखी के लिए प्रत्येक पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है। यह जुर्माना दो सप्ताह के भीतर एनजीटी बार एसोसिएशन के सचिव के पास जमा करना होगा।
एनजीटी का यह कदम देश में जल संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेलों से जुड़े संस्थानों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को निर्धारित है। इस फैसले से उम्मीद है कि स्टेडियम प्रबंधन शोधित जल के उपयोग को प्राथमिकता देंगे, जिससे भूजल स्तर पर दबाव कम होगा।
