हरियाणा और उत्तर प्रदेश के शहर वायु प्रदूषण के हॉटस्पॉट बन गए हैं। 4 फरवरी 2026 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 370 दर्ज किया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा से 700% अधिक है। यहां PM10 कणों का प्रभुत्व है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। इससे पहले 3 फरवरी को बल्लभगढ़ का उल्लेख नहीं था।
देश के 242 शहरों के विश्लेषण से पता चला कि केवल 4.5% (11 शहर) में हवा साफ (AQI 0-50) है, 38% (92 शहर) में संतोषजनक (51-100), जबकि 57.4% में चिंताजनक स्थिति है। कल से साफ हवा वाले शहरों में 83.3% वृद्धि हुई, लेकिन बेहद खराब वाले में 500% उछाल आया।
टॉप 10 सबसे प्रदूषित शहरों में बल्लभगढ़ पहले स्थान पर है, उसके बाद गाजियाबाद (363), ग्रेटर नोएडा (352), नोएडा (351), दिल्ली (339), चरखी दादरी (334), गुरुग्राम (334), धारूहेड़ा (332), अंगुल (316) और मानेसर (315) हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के 3 और हरियाणा के 5 शहर शामिल हैं। गाजियाबाद में कल से 26 अंकों की बढ़ोतरी हुई, जबकि दिल्ली में 67 अंकों का उछाल आया, जहां AQI 272 से 339 पहुंचा। फरीदाबाद में AQI 200 (+30) दर्ज हुआ, जो मध्यम श्रेणी में है।
कई शहरों में PM2.5 कण हावी हैं, जैसे गाजियाबाद, दिल्ली, नोएडा आदि, जबकि बल्लभगढ़, हनुमानगढ़ जैसे में PM10। 7 शहरों (झुंझुनू, जींद आदि) में AQI खराब (201-300) और 12 में बेहद खराब (301-400) है।
दूसरी ओर, श्रीनगर में AQI 22 सबसे साफ है, जो बल्लभगढ़ से 16 गुना बेहतर। अन्य साफ शहरों में अगरतला, बागलकोट, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, दमोह, झांसी, मदिकेरी, पुदुचेरी, शिलांग, वाराणसी शामिल हैं। संतोषजनक शहरों में चेन्नई (81), हैदराबाद (98), पटना (94) आदि हैं। मध्यम श्रेणी के 120 शहरों में मुंबई (134), लखनऊ (104), जयपुर (128) हैं।
AQI के अनुसार, 0-50 बेहतर, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बेहद खराब और 401-500 गंभीर है। प्रदूषण में उतार-चढ़ाव जारी है, जो स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त उपाय जरूरी हैं।
