देश में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, 20 जनवरी को गुरुग्राम सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 394 रिकॉर्ड किया गया। यह कल के 379 से 15 अंकों की बढ़ोतरी दर्शाता है। गुरुग्राम की हवा में PM2.5 कणों की अधिकता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा से 2,400 प्रतिशत अधिक है। इससे सांस की बीमारियां, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।
इसके विपरीत, शिलांग में हवा सबसे साफ रही, जहां AQI मात्र 32 दर्ज किया गया। गुरुग्राम की तुलना में शिलांग की हवा 11 गुना बेहतर है। देश के 243 शहरों के विश्लेषण से पता चलता है कि केवल 2.9 प्रतिशत शहरों में हवा साफ है, जबकि 30 प्रतिशत में संतोषजनक और 67.1 प्रतिशत में चिंताजनक स्थिति है। कल से साफ हवा वाले शहरों में 22 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि खराब हवा वाले शहरों में 36.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
टॉप 10 सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम पहले स्थान पर है। गाजियाबाद (AQI 393) दूसरे, नोएडा (382) तीसरे, दिल्ली (378) चौथे, धारूहेड़ा (373) पांचवें, ग्रेटर नोएडा (372) छठे, नारनौल (354) सातवें, भिवाड़ी (342) आठवें, चरखी दादरी (339) नौवें और मानेसर (328) दसवें स्थान पर हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के तीन (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा) और हरियाणा के पांच शहर शामिल हैं। फरीदाबाद में AQI 262 रहा।
दिल्ली में कल AQI 410 था, जो आज 378 पर आ गया, लेकिन अभी भी बेहद खराब है। 2025 में दिल्ली का सबसे प्रदूषित दिन 14 नवंबर था, जब AQI 461 पहुंचा। गाजियाबाद में कल 425 से आज 393 पर सुधार हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में पराली जलाना, वाहन उत्सर्जन और निर्माण कार्य प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है, जैसे ग्रेप लागू करना और जन जागरूकता बढ़ाना। प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क पहनें, बाहर कम निकलें और पेड़ लगाएं।
