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भारत में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति: गाजियाबाद सबसे प्रदूषित, दिल्ली में GRAP-4 लागू

by kishanchaubey
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18 जनवरी 2026 को भारत के कई शहरों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। गाजियाबाद सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 458 दर्ज किया गया। यह 17 जनवरी के 394 से 64 अंकों की बढ़ोतरी है, जिससे स्थिति ‘बेहद खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई। यहां प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा से 2,800 प्रतिशत अधिक है, और महीन कण PM2.5 पूरी तरह हावी हैं, जो स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकते हैं।

दिल्ली में AQI 440 पहुंचा, जो इस वर्ष का सबसे प्रदूषित दिन है। कल के 400 से 40 अंकों की वृद्धि के साथ, यहां भी GRAP-4 की सख्त पाबंदियां फिर से लागू कर दी गईं। GRAP-4 तब सक्रिय होता है जब प्रदूषण स्वास्थ्य पर सीधा खतरा बन जाता है। इससे पहले 14 नवंबर 2025 को दिल्ली का AQI 461 पहुंचा था, जो उस वर्ष का रिकॉर्ड था।

देश के 236 शहरों के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों से पता चलता है कि केवल 2.5 प्रतिशत शहरों में हवा साफ है, 27.1 प्रतिशत में संतोषजनक, जबकि 68.6 प्रतिशत में चिंताजनक स्थिति बनी हुई है। कल से साफ हवा वाले शहरों में 20 प्रतिशत, संतोषजनक में 16.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, लेकिन खराब हवा वाले शहरों में 9.4 प्रतिशत इजाफा चिंता का विषय है। बेहद खराब श्रेणी में 14.3 प्रतिशत गिरावट आई।

टॉप 10 सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (458) पहले, दिल्ली (440) दूसरे, नोएडा (430) तीसरे, ग्रेटर नोएडा (402) चौथे, पानीपत (397) पांचवें, गुरुग्राम (378) छठे, धारूहेड़ा (361) सातवें, मेरठ (352) आठवें, भिवाड़ी (348) नौवें और अंगुल (335) दसवें स्थान पर हैं। उत्तर प्रदेश के चार (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मेरठ) और हरियाणा के तीन (पानीपत, गुरुग्राम, धारूहेड़ा) शहर शामिल हैं। फरीदाबाद का AQI 247 रहा।

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देश में शिलांग की हवा सबसे साफ रही, जहां AQI मात्र 10 दर्ज हुआ। गाजियाबाद की तुलना में यहां स्थिति 45 गुना बेहतर है। कई शहरों जैसे बागपत, मुजफ्फरनगर, हापुड़, लखनऊ, कानपुर, कोलकाता आदि में PM2.5 प्रदूषक प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी, वाहन उत्सर्जन, निर्माण और पराली जलाने से स्थिति बिगड़ी है। सरकार को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है, अन्यथा स्वास्थ्य संकट गहरा सकता है।

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