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कर्नाटक में एक हफ्ते में 29 काले हिरणों की मौत, क्या है वजह ?

by kishanchaubey
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कर्नाटक के बेलागवी जिले स्थित कित्तूर रानी चनम्मा मिनी चिड़ियाघर में एक हफ्ते के भीतर 29 काले हिरणों की रहस्यमयी मौत ने वन्यजीव प्रेमियों और प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल यह संरक्षित प्रजाति अचानक बड़े पैमाने पर मरी जा रही है, जिससे चिड़ियाघर के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पहली घटना पिछले गुरुवार को हुई जब एक साथ 8 काले हिरण मृत पाए गए। शुक्रवार को कोई नई मौत नहीं हुई और एंटीबायोटिक्स देने से स्थिति नियंत्रित लग रही थी, लेकिन शनिवार को अचानक 20 और हिरणों ने दम तोड़ दिया। मरने वालों में 14 नर और बाकी मादा हिरण शामिल हैं।

चार साल पहले गदग चिड़ियाघर से लाए गए इन हिरणों की कुल संख्या में यह भारी क्षति मानी जा रही है।प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम में हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया (HS) नामक अत्यधिक संक्रामक बैक्टीरियल संक्रमण का पता चला है। बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क के यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मंजूनाथ वी. ने रविवार को निरीक्षण के बाद बताया कि ठंड बढ़ने और तापमान 13 डिग्री से नीचे जाने से तनाव बढ़ा, जिससे बैक्टीरिया सक्रिय हो गया।

वायरोलॉजिस्ट डॉ. चंद्रशेखर एन. के अनुसार, गंभीर प्रकोप में जानवर 2-3 घंटे में दम तोड़ सकते हैं। गुजरात के वडोदरा में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।मौत के सटीक कारण की पुष्टि के लिए विसरा, किडनी, लिवर, हृदय और खून के सैंपल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट मंगलवार तक आने की उम्मीद है।

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खाने के सैंपल भी जांचे जा रहे हैं। शेष 9 हिरणों को अलग कर इलाज शुरू कर दिया गया है।जू अथॉरिटी ऑफ कर्नाटक ने कर्मचारियों को फिलहाल क्लीनचिट दे दी है। सदस्य-सचिव सुनील पंवार ने कहा कि अभी तक लापरवाही के सबूत नहीं मिले, लेकिन आगे जांच में कमी पाई गई तो सख्त कार्रवाई होगी।

वन्यजीव प्रेमी गिरिधर कुलकर्णी ने इसे “बड़ा नुकसान” बताया और स्वास्थ्य सलाहकार समिति की जांच की मांग की। मौतों के बावजूद चिड़ियाघर को बंद न करने पर भी सवाल उठे, जिसे वन उप संरक्षक एन.ई. क्रांति ने गलतफहमी से बचने का आधार बताया।

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