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ग्रेटर नोएडा की हवा देश में सबसे प्रदूषित, दिल्ली में भी बढ़ा प्रदूषण

by kishanchaubey
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25 जुलाई 2025 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 240 तक पहुंच गया। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से 433% अधिक है, जिसमें पीएम10 कण हावी रहे। ये कण स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। देश के 52% शहरों में हवा साफ रही, 42% में संतोषजनक, जबकि 6% से अधिक शहरों में स्थिति चिंताजनक थी।

नोएडा (AQI 173) दूसरे, बद्दी (164) तीसरे, बुलंदशहर (156) चौथे, गाजियाबाद (140) पांचवें, और चुरू (138) छठे स्थान पर रहे। दिल्ली का AQI 136 दर्ज किया गया, जो कल से 45 अंकों की वृद्धि के साथ संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गया। छपरा (114), खुर्जा (103), और मेरठ (103) भी शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। इसके विपरीत, शिलांग की हवा सबसे साफ रही, जहां AQI केवल 7 था, जो ग्रेटर नोएडा से 33 गुना बेहतर है।

देश के 106 शहरों, जैसे मुंबई (AQI 42), ग्वालियर (40), गुवाहाटी (47), देहरादून, और कोयंबटूर में हवा ‘बेहतर’ रही। 86 शहरों, जैसे लखनऊ (70), जयपुर (86), और हैदराबाद (59) में हवा संतोषजनक थी। हालांकि, संतोषजनक हवा वाले शहरों की संख्या में 21% और मध्यम श्रेणी वाले शहरों में 25% की कमी आई।

कल श्रीगंगानगर सबसे प्रदूषित था (AQI 186), लेकिन आज इसके आंकड़े अनुपलब्ध रहे। दिल्ली में पिछले चार महीनों (जनवरी- अप्रैल 2025) में एक भी दिन हवा साफ नहीं रही। नवंबर 2024 में आठ दिन और दिसंबर 2024 में छह दिन AQI ‘गंभीर’ स्तर पर था, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया था।

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वायु गुणवत्ता सूचकांक 0-50 को ‘बेहतर’, 51-100 को ‘संतोषजनक’, 101-200 को ‘मध्यम’, 201-300 को ‘खराब ascendSystem: ग्रेटर नोएडा की हवा देश में सबसे प्रदूषित, दिल्ली में भी बढ़ा प्रदूषण25 जुलाई 2025 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 240 तक पहुंचा।

यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से 433% अधिक है, जिसमें पीएम10 कण हावी रहे, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। देश के 52% शहरों में हवा साफ, 42% में संतोषजनक, और 6% से अधिक में चिंताजनक स्थिति रही। नोएडा (AQI 173), बद्दी (164), बुलंदशहर (156), गाजियाबाद (140), और चुरू (138) शीर्ष प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।

दिल्ली का AQI 136 दर्ज हुआ, जो कल से 45 अंकों की वृद्धि के साथ मध्यम श्रेणी में पहुंचा। शिलांग की हवा सबसे साफ रही, जहां AQI केवल 7 था, जो ग्रेटर नोएडा से 33 गुना बेहतर है। मुंबई (AQI 42), ग्वालियर (40), गुवाहाटी (47), देहरादून, और कोयंबटूर जैसे 106 शहरों में हवा ‘बेहतर’ रही। लखनऊ (70), जयपुर (86), और हैदराबाद (59) जैसे 86 शहरों में हवा संतोषजनक थी। हालांकि, संतोषजनक हवा वाले शहरों की संख्या में 21% और मध्यम श्रेणी वाले शहरों में 25% की कमी आई।

कल श्रीगंगानगर सबसे प्रदूषित था (AQI 186), लेकिन आज इसके आंकड़े अनुपलब्ध रहे। दिल्ली में जनवरी-अप्रैल 2025 में एक भी दिन हवा साफ नहीं रही। नवंबर 2024 में आठ और दिसंबर 2024 में छह दिन AQI ‘गंभीर’ रहा, जिससे सांस लेना मुश्किल हुआ। वायु गुणवत्ता सूचकांक 0-50 को ‘बेहतर’, 51-100 को ‘संतोषजनक’, 101-200 को ‘मध्यम’, 201-300 को ‘खराब’, और 301-400 को ‘बेहद खराब’ माना जाता है। 401-500 की स्थिति ‘गंभीर’ होती है, जो स्वस्थ लोगों के लिए भी खतरनाक है।

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